क्या भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार से मुंह मोड लेंगे विदेशी कार निर्माता

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जयपुर। भारतीय बाजार में मंदी का दौर चरम पर चल रहा है। किसी भी तरफ से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए कोई आशा आती दिखाई नहीं दे ऱही है। जिस भी कंपनी की बात की जाये उसकी सेल्स गिर ही रही है। ऐसे में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के सामने एक नया संकट खडा हो गया है।

दरअसल समस्या इस बात की है कि इस अप्रत्याशित मंदी के खत्म होने के आसार नही नजर आ रहे है ऐसे में जो विदेशी कंपनियां है वो कब तक घाटा खायेंगी। उनके लिए तो इस समस्या से निकलेने का सबसे अच्छा तरीका यही है की इस देश से निकल लिया जाए।

ऐसे में चिंता इस बात की अगर ऐसा हो गया और विदेशी वाहन निर्माता यहां से चले गये। तो वो कंपनियां जो यहां के हजारों लोगों को रोजगार दे रही थी, जिन पर लाखों लोगों का जीवन आश्रित है बंद हो जायेंगी। जिससे लाखों जिंदगीयों पर संकट आ जायेगा। इसके अतिरिक्त भारत सरकार को मिलने वाला राजस्व भी बंद हो जायेगा। इन दोनों कारणों से देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर और दबाव आयेगा।

अगर आंकडों की बाद की जाए तो किसी भी विदेशी कंपनी की भारत में हालत अच्छी नहीं है। मारुती सुजुकी भारत का सबसे बडा ऑटो निर्माता होने के बावजूद अपनी बाजार हिस्सेदारी खोता जा रहा है और  सेल्स के मामले में सबसे बडा नुकसान भी इसे ही हुआ है। जहां तक हुंडई की बात की जाए तो एक वेन्यु को छोड दे तो इसकी भी कोई गाडी अच्छा प्रदर्शन नहीं पा रही है।

गौरतलब है कि भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग इसके मैन्यफैक्चरिंग उद्योग का 49 प्रतिशत तक है ऐसे में ये कैसे संभव है कि ऑटोमोबाइल डूब जाये और मैन्यफाकचरिंग चलती रहे।

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