क्यों बियॉन्से थीं ‘द लायन किंग’ के लिए परफेक्ट च्वॉइस?

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फिल्म निर्माता जॉन फेवरोऊ, बियॉन्से नॉलेस-कार्टर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा है कि यह देखना उत्साहवर्धक है कि ग्रैमी विजेता गायिका ने उनकी फिल्म ‘द लायन किंग’ में कैसा संगीतमय तत्व जोड़ दिया है। बियॉन्से ने ‘द लायन किंग’ में सिम्बा के बचपन की दोस्त नाला के किरदार को अपनी आवाज दी है जो बाद में उसकी लव इंटरेस्ट बन जाती है।

अपनी फिल्म ‘द लायन किंग’ में ग्रैमी अवॉर्ड विजेता गायिका बियॉन्से का हिस्सा बनने को लेकर जॉन काफी खुश व उत्साहित हैं।

फेवरोऊ ने एक बयान में कहा कि जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचते हैं जो नाला की भूमिका के वर्णन को लेकर उत्साहित हो, खासकर इसके संगीत प्रदर्शन से तो फिर बियॉन्से इसके लिए अपने आप में उत्कृष्ट हैं।

फेवरोऊ ने यह भी कहा कि वह उनके संगीत के बहुत बड़े प्रशंसक हैं।

यह फिल्म भारत में 19 जुलाई को अंग्रेजी, हिदी, तमिल और तेलुगू में रिलीज होगी।

फिल्म में डोनाल्ड ग्लोवर ने सिम्बा के किरदार को अपनी आवाज दी है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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