बाकि सभी खिडकियों से अलग क्यों होती हैं ट्रेन की यह खिड़की, जानें हैरान करने वाली वजह

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शायद ऐसा कोई व्यक्ति् होगा जिसने ट्रेन में सफर नहीं किया हो मगर क्या आपने कभी ध्यान दिया हैं कि ट्रेन की खिडकियों में कुछ खिडकियां बाकी सभी से अलग होती हैं । हम बात कर रहे हैं दरवाजे के पास वाली खिड़की के बारे में, जिसमें सामान्य से अधिक सरिया लगा होता है । मगर क्या आपने कभी सोचा है कि ये खिडकी बाकी खिडकियों से अलग क्यों होता हैं । तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में बता दें ।

दरअसल, दरवाजे के पास वाली खिड़की में चोरी होने का डर सबसे ज्यादा होता है । चोर अक्सर इन खिड़कियों मे हाथ डालकर सामान चुरा लेते थे । यात्री जब रात के समय सो रहे होते हैं, तब चोर इन खिड़कियों के जरिए आसानी से सामान चुरा लेते थे । इस समस्या से निजात पाने के लिए ही ट्रेन में इन खिड़कियों में सामान्य से अधिक सरिया लगाया गया । अधिक सरिया होने के कारण गैप इतना कम हो गया कि खिड़की में हाथ घुस नहीं सकता है । वहीं दरवाजों की खिड़कियों में भी अधिक सरिया वाली खिड़की लगाए जाने लगे हैं, ताकि रात में आउटर में गाड़ी रुकने के दौरान चोर खिड़की से हाथ डालकर दरवाजा न खोल पाएं ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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