पेटीएम को वॉट्सअप से खतरा क्यों?

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नवम्बर 2016 को नोटबंदी के बाद से भारत में कैशलेस ट्रांजैक्शन का प्रभाव बढ़ा है। केशलेस ट्रांजैक्शन में आपको पैसे के तौर पर नोट की ज़रुरत नहीं होती है। आप अपने क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से पैसे का लेन-देन कर सकते हैं। वैसे आज भी मध्यम वर्ग या गरीब इंसान नोट का ही इस्तेमाल कर रहा है। कार्ड के अलावा भी कई सारे मोबाइल ऐप भी हैं जो कि डिजिटल आदान-प्रदान करते हैं।Cashless-swipe-machine

पेटीएम का दौर

नोटबंदी के बाद से ही पेटीएम का उपयोग आमतौर पर स्मार्ट फोन चलाने वाले लोग करने लगे हैं। पेटीएम एक ऐप है, जिसमें लॉग इन करने के बाद आप अपने बैंक से पैसे इस ऐप में डाल सकते हैं। अगर आपको किसी को पैसे चुकाने है तो पेटीएम के ज़रिये आप उससे लेन-देन कर सकते हैं। इसके लिए जिसको आपको पैसे चुकाने हैं, या जिससे पैसे लेने हैं, उसके पास भी पेटीएम का होना ज़रुरी है।

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वॉट्सअप ने किया ऐलान

वॉट्सअप ने हाल ही में अपने कुछ यूज़र के लिए यूनिफ़ाइड पेमेंट इंटरफ़ेस (UPI) प्लेटफ़ॉर्म आधारित पेमेंट ऑन ट्रायल शुरु किया है। वॉट्सअप का धीरे धीरे अपने सारे यूज़र को ये सुविधा देने का मन है। वॉट्सअप के द्वारा पेमेंट करना आसान हो सकता है। क्योंकि इसके लिए आपको अलग से कहीं मोबाइल नंबर रजिस्टर कराने की ज़रुरत नहीं होगी। आपके पास वॉट्सअप है तो बस आप जैसे किसी को मैसेज भेजते हैं, उसी तरह से आप उसे पैसे भेज सकते हैं। वॉट्सअप का तरीका बहुत आसान माना जा रहा है।

पेटीएम को वॉट्अप से क्या है तकलीफ?

पेटीएम के पास करीब 30 करोड़ यूज़र हैं जबकि वॉट्सअप के पास करीब 23 करोड़ यूज़र हैं। वॉट्सअप के ऐलान के बाद पेटीएम के लिए ये गले की हड्डी जैसी हो गई है। पेटीएम ने वॉट्सअप के इस फैसले पर आरोप भी लगाया है। पेटीएम का कहना है वॉट्सअप अपने 23 करोड़ यूज़र तक कैशलेस ट्रांजैक्शन को सीमित करना चाहता है जो कि एक गलत तरीका है। पेटीएम के मुताबिक वॉट्सअप ने वॉल्ड गार्डन सर्विस अपने ग्राहकों को मुहय्या करा कर नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया के नियमों का उल्लंघन किया है। पेटीएम के अनुसार इस तरह का कैशलेस ट्रांजैक्शन भारतीय बैंकों के लिए एक खतरा है।

वॉट्सअप से पेटीएम को कई दिनों से परेशानी है। पेटीएम वॉट्सअप को चुनौती ही समझ रहा है। इस वजह से ही उसने अपने ग्राहकों को वॉट्सअप जैसे ही चैट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। ये प्रतिद्वंद्विता का भी मामला हो सकता है। अब इस बारे में फैसला तो नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया को ही लेना है। लेकिन इस कॉम्पटीशन में ग्राहकों की बल्ले-बल्ले ज़रुर हो रही है।

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