कोरोना संक्रमण में मना किया डॉक्टर ने आई-ब्रूफेन दवा लेने से जानिए क्यों

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जयपुर हेल्थ। मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार कोरोना में बुखार और दर्द की एक दवा का इस्तेमाल करने से मना किया गया है। ऐसा क्यों है, जानते है इस बारे में मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कोरोना वायरस के शुरुआती लक्षण वाले लोगों को बुखार, दर्द और सूजन में ली जाने वाली दवा आई-ब्रूफेन का इस्तेमाल करने की जगह पैरासिटामोल  का इस्तेमाल करना ज्यादा सही बताया गया है।

हालांकि बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की तरफ से ऐसी कोई सलाह नहीं दी गई है और ना ही  कोरोना वायरय के लक्षण वाले मरीजों को आई-ब्रूफेन के इस्तेमाल से मना किया है।

कोरोना के शुरूआती लक्षण में आई-ब्रूफेन का प्रयोग बहुत ही आम है। ऐसे में  इस अध्ययन में दावा किया गया है कि एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स के इस्तेमाल से बढ़ने वाला एक एंजाइम नए कोरोना वायरस  संक्रमण को बढ़ा सकता है।

बुखार की दवा आई-ब्रूफेन भी एक प्रकार का एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स है। फ्रांस की टॉलॉस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर जीन लूइस मॉन्टेसट्रस ने ट्वीट किया था- कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण हैं तो एनएसएआईडी लेना खतरनाक हो सकता है।

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री ऑलिवरवेरन ने भी ट्वीट किया कि एंटी-इंफ़्लेमेटरी ड्रग्स संक्रमण के बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। साथ ही ऑलिवरवेरन ने ये भी मेंशन किया था कि अगर आप ऐसी कोई दवा ले रहे हैं तो उसे बंद करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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