पूरा ब्रह्मांड समाया है इस एक अक्षर में, जाने इसकी शक्ति के बारे में

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जयपुर । प्राचीन समय के लिखे गये ग्रथों में जिन मंत्रों के दिया गया है वे अपने में किसी भी इच्छा को पूरा करने की अद्भुत शक्ति रखते है। बस इन मंत्रो का सही उच्चारण करना आवश्यक है। तभी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आज इस लेख में हम एक अक्षर का मंत्र ऊँ के बारे में बात करेंगे।

विभिन्न ग्रंथों में ऊँ शब्द का अलग-अलग महत्व बताया गया है। एक अक्षर का मंत्र है ऊँ जिसमें पूरे ब्राह्मांड की शक्तियां समाई हैं। जिस कारण से ऊँ को किसी भी मंत्र के आरंभ में लगाने से वह मंत्र शक्ति संपन्न होने के साथ उस मंत्र की शक्ति बढ जाता है।

ऊँ त्रिदेव का प्रतीक है। अ उ म इन तीनों अक्षरों में अ से अज यानी ब्रह्मा जो ब्रांह्माण्ड के निर्माता हैं सृष्टि निर्माण का कार्य जिनके पास है, उ से उनन्द यानी विष्णु जी जो ब्रह्माण्ड के पालनकर्ता है और सृष्टि को पालने का कार्य करते हैं म से महेश यानी भगवान शिव जो ब्रह्माण्ड में बदलाव के लिए पुराने को नया बनाने के लिए विघटन का कार्य करते हैं।

ऊँ जीवन में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों का प्रदायक है। ऊँ शब्द का जाप मिटाता है जीवन से संताप और शरीर में नव चेतना का संचार करता है। ऊँ का जाप करने से नकारात्मकता का अंत हो कर जीवन में सकारात्मकता की शुरुआत होती है।

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