आखिर कौन है वो जिससे “किन्नर” करते है शादी?

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जयपुर, किन्नर शब्द का नाम आते ही हमारे दिमाग मे एक अजीब सी छवि हमारे दिमाग में बन जाती है क्योंकि आज भी किन्नरों को समाज में अलग नजरों से देखा जाता है, इसलिए इनकी कोई भी जानकारी को जानने के लिए हर व्यक्ति इच्छुक होता है तो दोस्तों आज आपको बताते है कि किन्नर किससे शादी करते है। हालांकि इन लोगों की शादी महज एक ही दिन की होती है अगले दिन यह लोग विधवा हो जाते है जिसका एक दिन के लिए शोक भी मानाया जाता है। यह शादी हर किन्नर करता है क्योंकि इनकी मान्यता है कि शादी के बिना इनकी आत्मा को शातिं नहीं मिलती है।Related image

लेकिन सवाल यह उठता है कि यह लोग आखिर शादी किससे करते है। कौन है जो इनके साथ शादी के लिए तैयार रहता है। दरअसल यह लोग एक देवता से शादी करते है। और अगले दिन उसके मरने का शोक मनाते है। दोस्तों हमारे देश के तमिलनाडु राज्य मे एक मंदिर है जिसमें इरावन भगवान की पूजा की जाती है यह लोग भी इरावन भगवान को ही अपना आराध्य मानते है। औऱ उन्ही के साथ शादी करते है अब बात यह है कि यह उनके साथ ही शादी क्यों करते है तो इसके पीछे एक कहानी जुड़ी हुई है। कहा जाता है है एक बार अर्जुन को किसी चूक की सजा दी गई थी जिसके चलते उनहें एक साल के लिए वन प्रस्थान का आदेश दिया गया था।Image result for इरावन मंदिर केरल

जहां अर्जुन अपनी यात्रा करते हुए दक्षिण भारत मे पहुंच गए थे। जहां उनकी मुलाकात एक विधवा नाग राजकुमारी उलूपी से होती है। जहां दोनों मे प्रेम हो जाता है, औऱ वह शादी कर लेते है। जहां उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति होती है जिसका नाम इरावन रखा जाता है। अर्जुन राजकुमारी को छोड़कर अपनी यात्रा के लिए प्रस्थान कर जाता है। जहां उसका पुत्र मां के पास बडा हो जाता है। बाद में वह पिता के पास जाने की जिद करता है। जब वह अपने पिता के पास आता है तो महाभारत का युद्ध चल रहा होता है। जहां किसी राजकुमार की बलि दी जानी जरूरी थी।Image result for इरावन मंदिर केरल

वहां अर्जुन ने उनके बेट से कहा तो वह तैयार हो गया, पर उसने शर्त रखी की अविवाहित नहीं मरेगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने सुंदरी का रूप धारण करके उसके साथ शादी की जहां उसने अगले दिन अपने आप को माता के चरणों  मे बलि देदी। जहां भगवान ने एक दिन का शोक भी मनाया था। उसी के अनुसार परंपरा चल रही है कि भगवान पुरूष होकर नारी बने औऱ उनके साथ शादी की थी। इसलिए इन लोगों में यह परंपरा चल रही है।

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