..जब जिंदा दफन किए जाने के बाद भी नवजात शिशु जिंदा बचा

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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के सुनौरा गांव में इस सप्ताह के शुरू में जिंदा दफन पाए गए नवजात शिशु को ‘धरतीपुत्र’ नाम दिया गया है। शिशु को पहले स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया था और फिर उसे जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर है।

सीएचसी में शिशु को देखने वाले डॉक्टर मानवेन्द्र पाल ने कहा, “बच्चे को जोगिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया और उसकी स्थिति में अब सुधार हो रहा है। उसने कुछ कीचड़ निगल लिया है, लेकिन वह अब ठीक है।”

डॉक्टर ने कहा कि बच्चे को लगभग एक सप्ताह तक निगरानी में रखा जाएगा। घटना का पता तब चला जब स्थानीय ग्रामीणों ने एक बच्चे के रोने की आवाज को सुना। उन्होंने आवाज की दिशा में जांच की तो शिशु का एक पैर देखा। स्थानीय लोगों ने मिट्टी को हटाया और एक बच्चे को जिंदा दफन पाया।

इस बीच, जोगिया थाना प्रभारी अंजनी राय ने कहा कि घटना के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद शिशु को चाइल्डलाइन भेजा जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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