..जब सरोज खान ने करण मेहरा, निशा रावल को दिए 101 रुपये

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टीवी जोड़ी करण मेहरा और निशा रावल ने सोशल मीडिया पर सरोज खान के साथ अपनी पुरानी यादों को साझा किया। जोड़ी ने बताया कि उन्हें डांस रियल्टी शो ‘नच बलिये’ में महान कोरियोग्राफर ने 101 रुपये दिए थे। निशा ने लिखा, “नच बलिये में हमारे एक परफोर्मेस के दौरान सरोज खानजी से 101 रुपये प्राप्त करने की तस्वीर। करण को एक मिला और मुझे एक मिला। हम हमेशा इस याद को संभाल कर रखेंगे। चार दशक 2000 गीत। द डांसिंग क्वीन ऑफ इंडिया।”

निशा ने कहा, “आप हमेशा अपनी उदारता, विनम्रता और जबरदस्त प्रतिभा के लिए याद की जाएंगी। रेस्ट इन पीस।”

इसके साथ ही निशा ने उस रुपये की तस्वीर भी साझा की जो उन्हें सरोज खान से मिले थे।

करण ने भी उन्हें याद करते हुए कहा, “अपनी डांसिंग के लिए प्रसिद्ध अैर फिल्म इंडस्ट्री को जबरदस्त हिट देने वाली हमारी मास्टरजी स्वर्ग सिधार गईं। मुझे उनके सामने ‘नचले वे’ और ‘नच बलिये’ में परफोर्मेस करने और उनके प्रसिद्ध 101 रुपये पाने का सौभाग्य मिला।”

सरोज खान का गुरुवार देर रात 1.30 बजे दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) आने के बाद निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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