…जब एक दो दिन नहीं बल्कि 4 साल देरी से पहुंची यहां ट्रेन, जानिए क्यों ?

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दोस्तों, हम सब ने कई बार ट्रेन में सफर किया है कई बार ट्रेन अपने सही समय पर आ जाती है और कई बार हमें उसके लिए इंतजार करना होता है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि कोई ट्रेन एक दो दिन नहीं ​बल्कि पूरे चार साल देरी से पंहुचे । सुनकर यकीन नहीं हो रहा है ना मगर यह बात सच हैं कि एक ट्रेन करीब चार देरी से पंहुची ।

आपको बता दें कि जिस दूरी को तय करने में ट्रेन को करीब 42 घंटे 13 मिनट का ही समय लगता है उसे रेलवे विभाग की लापरवाही के कारण करीब चार साल का समय लगा । बताया जा रहा है कि साल 2014 में चली ट्रेन साल 2018 में अपने गंतव्य पर पहुंची ।

आपको बता दें कि यह पूरा मामला बस्ती जिले का है। जहां पर साल 2014 में विशाखापट्टनम से खाद लेकर चला रेलवे का वैगन करीब चार साल बाद पंहुचा । जिसके बाद स्टेशन पर जैसे वैगन पंहुचा तो अधिकारियों में खलबली सी मच गई। आपको बता दें कि इस ट्रेन में करीब 10 से अधिका माल भरा था । इसके साथ ही आपको बता दें कि इस ट्रेन में जो माल भरा उसके मालिक का भी कोई पता नहीं हैं ।

खबरों की मानें तो इस में जो माल था उसमें से करीब आधा तो खराब हो चुका था । इस बेकार हुए माल का हर्जाना कौन भरेगा इस बारे में अधिकारी अब तक तय नहीं कर पाए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि यह ट्रेन अपने सही समय पर तो निकली थी मगर रेलवे की लापरवाही के कारण अपने गतंव्य पर सहीं समय पर नहीं पहुंच पाई ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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