जब एक महिला ने बनाई 110 साल पुराने पेड़ में लाइब्रेरी…

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दोस्तों, आज के समय में लगभग हर दूसरे व्यक्ति को किताबें पढ़ने के शौक हैं ऐसे में लोगों के इसी शौक को देखते हुए एक शख्स ने लगभग 110 साल पुराने पेड़ पर ही लाइब्रेरी बना डाली है । जी हाँ… इस लाइब्रेरी को देखकर हर कोई यहां पर आकर पढना चाहता है । अब आपको बता दें कि, ये लाइब्रेरी अमेरिका के इडाहो राज्य में एक आर्टिस्ट ने अपने घर के बाहर सूखे पेड़ में बनाई है ।

लाइब्रेरी को बनाने वाले आर्टिस्ट का नाम शारले एमिटेज हॉवर्ड है जिन्होंने बताया कि उन्हें लाइब्रेरी को बनाने में करीब 73 डॉलर का खर्चा आया । इस बारे में शारले एमिटेज ने अपने फेसबुक पर लिखा कि, ‘हमें एक विशाल पेड़ को हटाना था, जो 110 साल पुराना था और सड़ रहा था. इसलिए मैंने इसे एक लाइब्रेरी में बदलने का फैसला किया । मैं हमेशा से यह करना चाहती थी. मैंने पूरे पेड़ के हटाने की बजाय उसे कुछ बेहतर बनाने में बदल दिया. लोगों को यह क्रिएटिविटी काफी पसंद आ रही है.’

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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