भारत में टेलीकॉम इन्टस्ट्री के बडे खिलाडियों के उपभोक्ताओं का क्या होगा।

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जयपुर। हाल ही में भारत में टेलीकॉम से जुडे कुछ आंकडे सामने आये हैं। जो भारतीय टेलीकॉम की तस्वीर को थोडा और साफ करते हैं। इन आंकडों में एक बात तो साफ नजर आ रही है, कि टेलीकॉम इन्डस्ट्री की हालत खराब होने के कारण लोग उन कंपनियों से दूर जा रहे हैं जिनकी हालत खराब है और उनकी और अग्रसर हो रहे है।

आपको बता दें, क्षेत्रीय नियामक ट्राई के आंकड़ों के अनुसार वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेलएनएसई ने इस साल सितंबर में 49 लाख से अधिक उपयोगकर्ता खो दिए, वहीं प्रतिद्वंद्वी रिलायंस जियो ने अपने नेटवर्क के अनुसार, 69.83 लाख नए उपयोगकर्ताओं को जोड़ा है।

ऐसे में स्पष्ट नजर आ रहा है टेलीकॉम बाजार में कुछ ही समय में एक ही खिलाडी रह जायेगा जो उपभोक्ताओं की स्वतंत्रता और मुनाफे को कम कर देता है। ऐसे में एक ही खिलाडी रह जाना बाजार के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं है।अगर सकल आंकडों पर नजर डालें तो भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार सितंबर 2019 के अंत से अगस्त 2019 के अंत तक कुल वायरलेस सब्सक्राइबर बढ़कर 117.37 करोड़ हो गए।

सितंबर में शहरी क्षेत्रों में वायरलेस सदस्यता घटकर 65.91 करोड़ हो गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 51.45 करोड़ हो गई। डेटा के अनुसार, भारती एयरटेल ने सितंबर में अपने कुल उपयोगकर्ता आधार को 32.55 करोड़ तक ले गया और 23.8 लाख उपयोगकर्ताओं को खो दिया। इसी तरह, वोडाफोन आइडिया ने अपने कुल उपयोगकर्ता आधार को 37.24 करोड़ तक ले गया और एक ही महीने में 25.7 लाख उपयोगकर्ता खो दिए।

गौरतलब है कि इतने बडे ग्राहक वर्ग होने के बाद भी अगर ये कंपनियां भारतीय बाजार को छोड कर जाती है तो इन उपभोक्ताओं का क्या होगा।

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