क्या है हिग्स बोसान जिसके पीछे दुनिया के सारे वैज्ञानिक पड़े है

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जयपुर। जब हमारा ब्रह्मांड अस्तित्व में आया तो उससे पहले सब कुछ अंतराल में तैर रहा था। इस स्थिति में  किसी चीज़ का तय आकार या द्रव्यमान नहीं था। जब ब्रह्मांड में हिग्स बोसोन भारी ऊर्जा लेकर आया तो सभी कण उसकी वजह से आपस में जुड़ने लगे और उनमें द्रव्यमान पैदा हो गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिग्स बोसोन की वजह से ही ब्रह्मांड में कई करोड़ आकाशगंगाएँ, ग्रह, तारे और उपग्रह बने है। दुनिया के अति सूक्ष्म कणो को वैज्ञानिक दो श्रेणियों में बाँटते हैं- स्थायी और अस्थायी।

जो कण स्थायी होते हैं उनकी बहुत लंबी आयु होती है जैसे प्रोटोन अरबों खरबों वर्ष तक जीवित रहते हैं जबकि अस्थायी कण कुछ ही क्षणों मे क्षय होकर अन्य स्थायी कणो मे परिवर्तित हो जाते है और हिग्स बोसोन बहुत ही अस्थिर कण है, वह इतना क्षणभंगुर था कि वह बिग बैंग के समय एक पल के लिए आया और सारी चीज़ों को द्रव्यमान देकर खत्म हो गया। इस  ब्रह्मांड को रएक कुछ एक क्षण में इतनी ऊर्जा दि की इससे इतने बड़े ब्रह्मांड का निर्माण हो गया। वैज्ञानिक नियंत्रित तरीक़े से, बहुत छोटे पैमाने पर वैसी ही परिस्थितियाँ पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें हिग्स बोसोन आया था।

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रयोग में जिस तरह हिग्स बोसोन का क्षय होने से पहले उसका रुप बदलता है उस तरह के कुछ अति सूक्ष्म कण देखे गए हैं इसलिए आशा पैदा होती है कि यह प्रयोग सफल हो सकता है और ईश्वर कण को पाया जा सकता है। जिससे ब्रह्मांड के कई रहस्य सुलझाये जा सकते है। CERN मे हिग्स बोसान की खोज के लिये दो प्रयोग चल रहे हैं। एक वर्ष के प्रयोगो के पश्चात दोनो प्रयोगों ने एक ऐसा कण पाया है जोकि हिग्स हो सकता है लेकिन वैज्ञानिक 100% विश्वास से ऐसा नही कह रहे है। कुछ वैज्ञानिक 94% ही विश्वास है।

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