मज़दूर वर्ग के लिए मंदी का क्या अर्थ है?

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जयपुर। भारतीय अर्थव्यवस्था में चल रहे गतिरोध और लड़का हक को लेकर अब भयंकर रूप से कराया जा रहा है और कॉर्पोरेट क्षेत्र में बहुत अधिक अफरातफरी मची रही है आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे वित्त मंत्री और उनके मंत्रालय की सहयोगी यों के साथ विचार मंथन करने के लिए बैठक भी बुलाई थी इसके अलावा बता दें कि इससे पहले ही सीतारमण बैंक करो उद्योग जगत के कप्तान और पूंजी बाजार के खिलाड़ियों के साथ एक बैठक होने में व्यस्त रही थी.

आपको बता दें कि इस वक्त देश के हालत अर्थव्यवस्था को लेकर काफी नाजुक बने हुए हैं जहां एक तरफ हमारी अर्थव्यवस्था की रैंकिंग विश्व भर में गिर रही है, वहीं टीवी मीडिया में इसकी बात नहीं दिखाई जा रही है और इसका असर उन गरीब मजदूरों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है जो इंडस्ट्रीज और कारखानों के बंद होने से बेरोजगार होते जा रहे हैं.

मांग कम होने के कारण कई औद्योगिक और सेवा क्षेत्र पर बड़ा संकट सामने खड़ा है और जिसकी वजह से वह श्रमिकों को काम से छुट्टी कर रहे हैं आपको बता दें कि ऑटो इंडस्ट्री और टैक्सटाइल इंडस्ट्री में जहां काम 7 दिन होता था उसे 4 दिन और 5 दिन कर दिया गया है जिसके चलते अब वहां पर काम करने वाले मजदूरों को काम पर नहीं बुलाया जा रहा है और काम पर नहीं बुलाए जाने के कारण उन्हें इस बात की पगार भी नहीं मिल रही है जिसके कारण उनको काम धंधा कम हुआ है और उनकी पगार कम हुई है और इसका असर सीधे सीधे गरीब मजदूरों पर पड़ रहा है.

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