पश्चिम बंगाल : सड़क हादसे में घायल 3 चयनकर्ताओं की हालत स्थिर

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बंगाल महिला क्रिकेट टीम की तीन चयनकर्ता रविवार को एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गईं। तीनों चयनकर्ता अंडर-23 टीम की चयन ट्रायल के लिए जा रही थीं। घायलों को जिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है उसने एक बयान में कहा कि सभी की हालत स्थिर है और दो को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

अस्पताल ने कहा, “सभी मरीजों को कई चोटें लगी हैं। उनमें से दो को चेहरे की चोटों और लंबी हड्डियों में फ्रैक्च र के कारण सर्जरी करनी पड़ेगी। घायलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उन्हें उचित उपचार दिया जा रहा है।”

सूत्रों ने बताया कि चंदना, पूर्णिमा और श्यामा अंडर-23 टी-20 ट्रॉफी के लिए चयन ट्रायल के लिए बंगाल में बीरभूम जिले में सुरी जा रही थीं तभी शक्तिगढ़ इलाके में इनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

इस बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर डायना इडुलजी ने इस मदद के लिए सीएबी का शुक्रिया अदा किया है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मैंने बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली से बातचीत की है और उन्होंने कहा कि सीएबी इस मामले को देख रहा है। उन्होंने साथ ही चयनकर्ताओं को सभी सुविधाएं मुहैया कराने को कहा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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