वेपिंग भी बन रही है कैसर की एक वजह, जानिए पूरी खबर

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जयपुर। धूम्रपान स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है, यह वैधानिक चेतावनी आमतौर पर हर तंबाकू उत्पाद तथा सार्वजनिक स्थल पर लिखी हुई होती हैं। इसके बावजूद भी हर साल लाखों लोग कैंसर के कारण मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। स्मोकिंग की लत से छुटकारा पाने के लिये आजकल एक नई तकनीक विकसित हुई है, जिसे वेपिंग कहा जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या ई-सिगरेट नोट एक प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है, जो तम्बाकू रहित धूम्रपान को विकसित करने का प्रयास करता है। ई-सिगरेट में तंबाकू की जगह एक तरल पदार्थ जिसे ई-तरल कहा जाता है, को इन्हेल किया जाता है।

ई-सिगरेट पीने वालों का यह मानना है कि यह आम सिगरेट से कम नुकसान पहुंचाती हैं, क्योंकि इसमें निकोटीन के अलावा तंबाकू में पाये जाने वाले अन्य हानिकारक यौगिक नहीं पाये जाते हैं। दूसरा तर्क यह है कि यह सिगरेट धुंआ नहीं छोड़ती है। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कैंसर उत्पन्न करने के लिये निकोटीन अकेला ही काफी है।

नतीजों में यह पाया गया कि निकोटीन की वाष्प चूहों के डीएनए को नुकसान पहुंचाती है, जिससे उनमें कैंसर कोशिकाएं विकसित होने लग जाते हैं।

रिसर्च और डॉक्टर चाहे कुछ भी कहे पर सच यही है कि एक लत से पीछा छुड़ाने के लिये कोई दूसरी लत नहीं डालनी चाहिये। धुंआरहित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का विकल्प के तौर पर इस्तेमाल भी कई तरह की शारीरिक समस्याओं को न्यौता देता हैं।

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