मौसम विभाग की भविष्यवाणी अब सच साबित होगी, जी हां नई तकनीक आ गई है

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जयपुर। भारतीय किसानों की हालत मानसून पर निर्भर है। अगर बारिश नही हुई तो किसाना के घर का चूल्हा नहीं जलता है। उस पर हमारे मौसम विभाग की भविष्यवाणी तो सोने पर सुहागे का काम कर देती हैं। अब तो अपनी लापरवाह प्रणाली के चलते मौसम की भविष्यवाणी एक मजाक बन चुकी है। इसका सीधा कारण लचर सरकारी व्यवस्था और बरसों पुरानी वही बाबा आदम के जमाने की तकनीक को काम में लेना है। भारत में मानसून का मिजाज़ हर क्षेत्र को यहां तक की राजनीति को भी बहुत प्रभावित करता है।

ऐसे में कई बार यह विचार आता है कि हमारे देश में भी मानसून के सटीक पूर्वानुमान के लिए शानदार तकनीक होनी चाहिए। जब हर क्षेत्र में हम तरक्की कर रहे हैं तो फिर खेती में क्यों पिछड़ रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमानों का हमेशा से मजाक बनता रहा है। ऐसे में अमेरिका से आई एक खुशखबरी आई है कि अब ऐसी तकनीक खोज ली गई है।

जी हां अब भारतीय किसानों को भी समय रहते यह पता चल जाएगा कि कब और कहां बरसात होगी। हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टूल बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है जो भारतीय मौसम विभाग की खराब हो चुकी छवि को फिर से चमका देगा। यह उपकरण काफी बेहतर तरीके से मानसून के आने जाने की सटीक भविष्यवाणी कर पाएगा। अमेरिका की फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी ने यह खास उपकरण बनाया है। यह नई तकनीक क्लाइमेट डायनामिक्स नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुई है।

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