डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ रुपया

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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आई तेजी और दुनिया के प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में आई मजबूती से रुपया फिर डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले पिछले सत्र से छह पैसे की कमजोरी के साथ 69.40 रुपये प्रति डॉलर पर खुलने के बाद शुरुआती कारोबार के दौरान 69.47 रुपये प्रति डॉलर पर बना हुआ था। बाजार के जानकारों के मुताबिक, घरेलू मुद्रा बाजार खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए तनाव से भी प्रभावित हुआ है। उधर, छह अंतर्राष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचक डॉलर इंडेक्स में पिछले दिनों से तेजी का रुख है जबकि इससे पहले छह दिनों तक डॉलर इंडेक्स में गिरावट का रुख देखा गया था। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा इस साल ब्याज दर में कटौती का संकेत दिए जाने के बाद से डॉलर में कमजोरी आई थी। डॉलर इंडेक्स पिछले सत्र के मुकाबले 0.17 फीसदी की गिरावट के साथ 95.808 बना हुआ था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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