हमने अपनी रणनीति को अच्छे से लागू किया : Rohit Sharma

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आईपीएल-13 में बुधवार को अपनी जीत का खाता खोलने वाली मौजूदा विजेता मुंबई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा है कि टीम ने अपनी रणनीति को मैदान पर अच्छे से लागू किया इसलिए वो मैच जीतने में सफल रही। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए थे। कोलाकाता के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को मुंबई के गेंदबाजों ने 20 ओवरों में नौ विकेट पर 146 रनों तक ही सीमित कर दिया।

मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में रोहित ने कहा, “यह अपनी रणनीति को सही से लागू करने की बात है, जो हमने किया। हम मैच में हमेशा आगे थे, लेकिन यह लगातार यही करने की बात है।”

रोहित ने इस मैच मैच में 54 गेंदों पर छह छक्के और तीन चौकों की मदद से 80 रनों की पारी खेली। इस पारी के लिए वो मैन ऑफ द मैच भी चुने गए।

अपनी पारी को लेकर रोहित ने कहा, “छह महीने बिना क्रिकेट के काफी लंबा समय होता है। मैं विकेट पर कुछ समय बिताना चाहता था। ऐसा पहले मैच में नहीं कर सका, लेकिन खुश हूं कि आज कर सका। यहां लंबी पारी खेलना आसान नहीं है। मैं बस खड़ा होकर मारना चाहता था।”

न्यूज स्त्रोत आइएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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