हम खिताब जीतने आए हैं : कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन

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भारतीय फुटबाल टीम के मुख्य कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन ने गुरुवार को कहा कि उनकी टीम सैफ सुजुकी कप खिताब जीतने यहां आई है। हालांकि, कोच ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि मालदीव के खिलाफ टूर्नामेंट का फाइनल मैच आसान नहीं होगा।

भारतीय टीम का सामना 15 सितम्बर को बंगबंधु स्टेडियम में मालदीव से होगा। मालदीव ने नेपाल को हराकर फाइनल में जगह बनाई है।

कोच कांस्टेनटाइन ने कहा, “मालदीव ने नेपाल के खिलाफ सेमीफाइनल में अपनी क्षमता दर्शाई है। नेपाल के खिलाफ इस टीम के लिए 3-0 की जीत आसान नहीं थी और इस मैच में मालदीव के मुख्य खिलाड़ी भी मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद वह प्रतिद्वंद्वी टीम पर दबाव बनाने में सफल रही।”

कोच ने कहा, “ऐसे में हमें मालदीव के खिलाफ मुश्किल मैच की उम्मीद है। हालांकि, मैंने पहले भी कहा है कि हम इस टूर्नामेंट को जीतने के इरादे से यहां आए हैं।”

इसके साथ कांस्टेनटाइन ने उन्हें अपने तरीके से टीम के साथ काम करने के लिए अनुमति देने हेतु अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ का आभार जताया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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