हम अच्छी शुरुआत को कायम नहीं रख सके : Steve Smith

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सनराइजर्स हैदराबाद के हाथों गुरुवार को मिली हार के बाद राजस्थान रॉयल्स के कप्तान स्टीव स्मिथ ने कहा कि उनकी टीम अच्छी शुरुआत को कायम नहीं रख सकी। राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए हैदराबाद के सामने 155 रनों का लक्ष्य रखा था। हैदराबाद ने दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

राजस्थान ने शुरुआत में दो विकेट ले हैदराबाद को परेशानी में डाल दिया था, लेकिन मनीष पांडे और विजय शंकर ने शतकीय साझेदारी कर टीम को जीत दिलाई।

मैच के बाद स्मिथ ने कहा, “मुझे लगता है कि हमने अच्छी शुरुआत की थी। जोफ्रा ने दो विकेट लेकर अच्छा काम किया, लेकिन हम इसे जारी नहीं रख सके। विकेट अच्छी हो गई थी। कुछ ओस थी। आर्चर का तीसरा ओवर मेरे दिमाग में चल रहा था, मैंने चर्चा भी की थी। मुझे लगता है कि आर्चर को लगातार तीसरा ओवर डलवाना चाहिए थे।”

पांडे ने नाबाद 83 और शंकर ने नाबाद 52 रन बनाए और तीसरे विकेट के लिए 140 रनों की साझेदारी कर हैदराबाद को जीत दिलाई।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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