देश के प्रमुख जलाशयों में जलस्तर 2 फीसदी घटा

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देश के प्रमुख जलाशयों में पिछले सप्ताह के मुकाबले इस सप्ताह जलस्तर में दो फीसदी की कमी आई है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर जारी साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 118.304 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 फीसदी है।

इससे पहले चार अक्टूबर 2018 को समाप्त हुए सप्ताह में जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 फीसदी था।

पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 109 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 102 फीसदी है।

मंत्रालय की की विज्ञप्ति के अनुसार, इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का करीब 63 फीसदी है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जिनसे 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली उत्पादन में सहायक हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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