भारत ने चांद का दक्षिणी हिस्सा ही क्यों चुना है?

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जयपुर। भारत द्वारा आज अपने महत्वाकांक्षी और अपने अब तक के एक बड़े अभियान चंद्रयान 2 की सफलता को पूर्ण कर लिया है और आज उसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लांच कर दिया गया है और लांच होने के बाद से अब तक अभी तक सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है.

दक्षिणी ध्रुव ही क्यों?

अब अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चल चले तो बता दूं कि चंद्रयान 2 अभियान के तहत ए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन जाएगा और अब यह सवाल उठता है कि इसी इलाके को क्यों चुना गया.

आपको बता दें कि सभी वैज्ञानिकों की इस इलाके में दिलचस्पी इसलिए है क्योंकि इसके बारे में अब तक बहुत ही कम जानकारी हमारे सामने आ सकी है और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सूरज की थोड़ी ही रोशनी पहुंचती है. इसके अलावा चंद्रमा की दूरी के थोड़े से जुकाम के चलते इसकी कुछ इलाके तो हमेशा ही छाया में रहते हैं और यह बहुत बड़े विशाल गड्ढे हैं जिन्हें कोल्ड ट्रैप्स कहा जाता है और इसमें तापमान शून्य से लेकर 200 डिग्री तक नीचे जा सकता है.

आपको बता दें ऐसे में इन जगहों पर सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि अन्य तत्व भी जमीन अवस्था में में पहुंचते हैं और इस तापमान में कई ऐसी कैसे हैं जो जमी हुई पाई जाती है वैज्ञानिकों का मानना है कि इन कोल ट्रैप्स में मौजूद तत्व तीन अरब साल से जमी हुई अवस्था में हो सकते हैं.

इसके अलावा वैज्ञानिकों के मुताबिक इसमें हमारे सौरमंडल के शुरुआती द्वारों के बारे में कुछ अहम जानकारियां हासिल हो सकती और इन जानकारियों के जाट इंपैक्ट हाइपोथेसिस की पुष्टि भी हो सकती है और इस अवधारणा के मुताबिक करीब 4.4 साल पहले पृथ्वी से इसकी ही आकार का एक विशाल पिंड टकराया था जिससे चंद्रमा वजूद में आया है.

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