वार्नर की पत्नी ने पति की तारीफ में महात्मा गांधी का जिक्र किया

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आस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर की पत्नी कैंडिस ने अपनी पति की तारीफ करते समय महात्मा गांधी का जिक्र किया है। वार्नर ने दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 335 रनों की नाबाद पारी खेली। इसके बाद उनकी पत्नी कैंडिस ने ट्विटर पर अपने पति की जमकर तारीफ की।

कैंडिस ने ट्विटर पर लिखा, “ताकत शारीरिक शक्ति से नहीं आती है, यह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है (महात्मा गांधी)।”

उन्होंने आगे कहा, “यह जरूरी नहीं है कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं। सबसे जरूरी यह है कि आप खुद पर कितना भरोसा रखते हैं।”

वार्नर ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में, जोकि दिन-रात टेस्ट मैच था, 335 रन की नाबाद पारी खेली।

वार्नर ने जैसे ही शतक पूरा किया, कैंडिस उस समय एडिलेड में स्टैंड में थीं। वार्नर ने जैसे ही अपना तिहरा शतक पूरा किया, वह खुशी में झूम उठे। कैंडिस भी उन्हें देखकर कुछ भावुक हो गई थीं।

वार्नर टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले सातवें आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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