बालक पालक’ का हिंदी रीमेक बनाना चाहता हूं : अक्षय कुमार

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अभिनेता एवं निर्माता अक्षय कुमार का कहना है कि वह मराठी फिल्म ‘बालक पालक’ के हिंदी रीमेक का हिस्सा बनना चाहते हैं। इस मराठी फिल्म को उनके करीबी मित्र अभिनेता-निर्माता रितेश देशमुख ने बनाया था।

उन्होंने अपनी आगामी मराठी फिल्म ‘चुंबक’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान यह बात कही। उनके साथ स्वानंद किरकिरे, साहिल जाधव, संग्राम देसाई और निर्देशक संदीप मोदी जैसे सितारे मौजूद थे।

वर्ष 2003 की ‘बालक पालक’ रितेश द्वारा निर्मित थी। यह यौन शिक्षा पर आधारित एक कॉमेडी फिल्म थी।

किसी मराठी फिल्म के रीमेक का हिस्सा बनने के बारे में अक्षय ने कहा, “यहां की एक फिल्म मैंने देखी थी ‘बालक पालक’ और यह बोल्ड फिल्म थी। मुझे लगता है कि मराठी सिनेमा अपने विषय को लेकर बोल्ड है और उसमें वर्जित विषयों को प्रस्तुत करते हुए हिचक नहीं है। मैं इस फिल्म का हिदी रीमेक बनाना चाहता हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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