वेजयरहाउस लीज में इस साल की पहली छमाही में 31 फीसदी वृद्धि

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लॉजिस्टिक्स यानी वेयरहाउसिंग स्पेस लीज देश के आठ महानगरों में इस साल की पहली छमाही में 1.3 करोड़ वर्ग फुट से ज्यादा रही, जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 31 फीसदी अधिक है। यह जानकारी सोमवार को कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई ने दी। रियल स्टेट कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू में कुल लीज कारोबार का 60 फीसदी कारोबार रहा, जबकि बाकी कारोबार दिल्ली-एनसीआर, अहमदाबाद, कोलकाता, पुणे और हैदराबाद में रहा।

सीबीआरई के भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य-पूर्व और अफ्रीका मामलों के सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा, “2020 तक पूरे सेक्टर की कुल पाइपलाइन छह करोड़ वर्गफुट तक रह सकती है और प्रमुख कंपनियों द्वारा आपूर्ति में कम से कम 2.2 करोड़ वर्गफुट बढ़ने की उम्मीद है।”

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लॉजिस्टिक्स सेक्टर में ऑटोमेशन, सप्लाई चेन में परिवर्तन और निवेश में वृद्धि के रूप में संरचनात्मक बदलाव हो रहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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