वैसाख षष्ठी में करें देवी धैर्यलक्ष्मी की पूजा, मिलेगा व्यापार में लाभ

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जयपुर। शुक्रवार 6.04.18  को वैसाख माह की षष्ठी तिथि के साथ मूल नक्षत्र होने से देवी लक्ष्मी के  धैर्यलक्ष्मी स्वरूप की पूजा की जाएगी। देवी के इस स्वरुप से जीवन में धैर्य व आत्मबल बढता है। धैर्यलक्ष्मी का वाहन सिंह व ये अपने आठ हाथों में शंख, चक्र, तलवार, कमल, कलश, अंकुश, धनुष, बाण व वरदान मुद्रा धरण करती हैं। धैर्यलक्ष्मी की पूजा व उपाय करने से व्यापार में लाभ,  अकस्मात आर्थिक हानि से मुक्ति तथा धन में वृद्धि होती है।

पूजा विधि – घर के मंदिर में ईशानमुखी होकर गुलाबी वस्त्र पर देवी लक्ष्मी की मूर्ती स्थापित कर विधिवत पूजन करें। गाय के घी में इत्र मिलकर दीपक जलाएं,  चंदन की धूप जलाएं,  गुलाल व गुलाबी फूल चढ़ाएं, चावल की खीर का भोग लगाएं तथा पूजा करने के बाद भोग को प्रसाद रूप में किसी सुहागन स्त्री को भेंट करें।

पूजा मुहूर्त –  प्रातः 9:48 बजे  से प्रातः 10:48  बजे तक।
मंत्र –  ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धैर्यलक्ष्म्यै नमः॥ इस मंत्र का जाप करें।

उपाय

  • लक्ष्मी पर चढ़े चावलों को पक्षियों को देने से आर्थिक हानि से मुक्ति मिलती है।
  • लक्ष्मी पर चढ़ी हल्दी की 11 गांठें को तिजोरी में रखने से घर में खुशहाली आती हैं।
  • लक्ष्मी पर चढ़े सूखे आंवले को तिजोरी में रखने स  व्यापारिक लाभ मिलेगा।

 

 

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