Violence in Delhi : महाराष्ट्र के नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधा, शांति की अपील की

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नई दिल्ली में मंगलवार को किसान आंदोलन के हिंसक हो जाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए, महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को ‘अहंकारी, असंवेदनशील’ करार दिया। उन्होंने साथ ही लोगों से शांति की अपील की। हिंसा के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए, एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को नियंत्रित करना सरकार का कर्तव्य था, लेकिन वे पूरी तरह से विफल रहे।

उन्होंने कहा, “60 दिनों से, किसान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश से हैं और अनुशासित तरीके से आंदोलन किया है। हालांकि, सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया और जैसे ही उनका संयम समाप्त हुआ, ट्रैक्टर मार्च निकाला गया।”

यह कहते हुए कि राष्ट्रीय राजधानी में जो कुछ भी हुआ है, उसका कोई भी समर्थन नहीं करेगा।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि जब किसान लाल किले में प्रवेश कर रहे थे, उस वक्त सरकार क्या कर रही थी?

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने हिंसा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के ‘अहंकार’ को जिम्मेदार ठहराया।

news source आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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