विजय हजारे ट्राफी : मुंबई ने गोवा को 130 रनों से करारी शिकस्त दी

0

यशस्वी जायसवाल के 113 रनों की दमदार पारी की बदौलत मुंबई ने यहां खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी के ग्रुप-ए के मैच में गोवा को 130 रनों से करारी शिकस्त दी। जायसवाल के अलावा, सलामी बल्लेबाज आदित्य तारे ने 86 रनों की पारी खेलकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई ने निर्धारित 50 ओवर में चार विकेट खोकर कुल 362 रन बनाए। मुंबई के लिए सलामी बल्लेबाज जायसवाल और तारे ने पहले विकेट के लिए 152 रनों की बड़ी साझेदारी की।

इसके बाद, कप्तान श्रेयस अय्यर के 47 और सिद्धेश लाड के 34 रनों की बदौलत मुंबई बड़े स्कोर की ओर अग्रसर हुई। सूर्यकुमार यादव ने नाबाद 34 और शिवम दुबे ने नाबाद 33 रन बनाते हुए अपनी टीम के स्कोर को 350 के पार कर दिया।

जवाब में गोवा की शुरुआत खराब हुई और उसने 13 रन पर ही अपना पहला विकेट खो दिया। मध्यक्रम में स्नेहल कौथांकर ने जरूर अर्धशतक लगाया, लेकिन वह टीम को जीत के आसपास भी नहीं ले जा पाए। गोवा की पूरी टीम 48.1 ओवर में 232 रनों पर सिमट गई।

मुंबई के लिए सबसे अधिक विकेट शम्स मुलानी (3) ने चटकाए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleहरियाणा में शाह की रैलियां बुधवार से, मोदी की 14 अक्टूबर से
Next articleINDvsSA:पुणे में विराट कोहली को बतौर कप्तान अब इतिहास रचने से कोई नहीं रोक सकता
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here