VHP की हरिद्वार में होगी बड़ी बैठक, मंदिरों को नियंत्रण मुक्त करने की उठेगी मांग

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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की 9 अप्रैल को हरिद्वार में होने जा रही बड़ी बैठक में कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। सुबह 10 से शाम छह बजे तक होने वाली इस एक दिवसीय बैठक में विहिप के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा शंकराचार्य व अन्य गणमान्य संत हिस्सा लेंगे। विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आईएएनएस को बताया कि मार्गदर्शक मंडल के संतों की बैठक में कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। इसमें राम मंदिर निधि समर्पण अभियान की समीक्षा होगी। इसके अलावा देशभर में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मांग भी उठ सकती है। धर्मांतरण और लव जेहाद के मुद्दे पर भी चर्चा की संभावना है।

हरिद्वार स्थित परमानंद महराज के अखंड परमधाम आश्रम में होने वाली इस बैठक में विहिप के केंद्रीय कार्याध्यक्ष अलोक कुमार, महामंत्री मिलिंद परांडे, धमार्चार्य व संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी, मंडल संयोजक जीवेश्वर मिश्र सहित कई पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।

न्रूूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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