विहिप पदाधिकारी चाहते हैं उन पर हो कोरोना वैक्सीन का परीक्षण

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भारत के कोविड-19 वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण करने के लिए हरी झंडी मिलने की खबरों के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक शीर्ष पदाधकारी ने इसके लिए खुद को पेश किया है। विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने इस संबंध में रोहतक में पंडित भागवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को लिखा है, जो उन अस्पतालों में से एक है जिसके प्रमुख को आईसीएमआर के डीजी बलराम भार्गव ने कोविड-19 वैक्सीन का क्लीनिकल परीक्षण इंसानों पर शुरू करने के लिए पत्र लिखा है।

क्लीनिकल परीक्षण के लिए खुद को पेश करते हुए, जैन ने लिखा, “जब भी आप मुझे इन परीक्षणों के लिए बुलाएंगे, मैं तैयार रहूंगा।”

वैक्सीन को भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया जा रहा है। भार्गव ने एक पत्र में किंग जॉर्ज कॉलेज (विशाखापट्टनम), पंडित पंडित भागवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (रोहतक) के प्रमुखों और एम्स नई दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया को पत्र लिखकर क्लीनिकल परीक्षण के बारे में सूचित किया है।

श्रन्यू स्त्रात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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