वट पूर्णिमा 2020: सनातन धर्म में वट पूर्णिमा व्रत का क्या है महत्व और विधि, जानिए

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हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता हैं वही वट पूर्णिमा व्रत इस वर्ष 5 जून को पड़ रही हैं यह व्रत विवाहित महिलाओं के द्वारा ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाता हैं यह व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से रखा जाता हैं जबकि उत्तर भारत में यह व्रत वट सावित्री के रूप में मनाया जाता हैं, जो ज्येष्ठ महीने की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता हैं। वही धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ऐसा कहा जाता हैं कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी। इसी कारण विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं।

जानिए शुभ मुहूर्त—
पूर्णिमा तिथि आरंभ— जून 5, 2020 को 03:17:47 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त— जून 6, 2020 को 24:44 बजे

वट पूर्णिमा व्रत को सावित्री से जोड़ा गया हैं वही सावित्री जिनका पौराणिक कथाओं में श्रेष्ठ स्थान हैं कहा जाता हैं कि सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से ले आई थी। वट पूर्णिमा व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं जिससे उनके पति को समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति हो। वट पूर्णिमा व्रत में सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें। व्रत का संकल्प लें। महिलाएं इस व्रत की शुरुआत पूरे श्रृगांर करने के बाद शुरू करें। इस दिन पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता हैं बरगद के पेड़ की पूजा आराधना की जाती हैं। उस पर पुष्प, अक्षत, मिठाई अर्पित करें। सावित्री व्रत कथा सुने और व्रत रखें।

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