वास्तुशास्त्र: जानिए किस दिशा में मिलता हैं व्यक्ति को मान-सम्मान और धन दौलत

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हर व्यक्ति चाहता हैं,कि उसके जीवन और घर परिवार में हमेशा ही सुख शांति और समृद्धि बनी रहें। इसके लिए बहुत से लोग कई तरह के उपाय करते हैं। मगर वे सफल नहीं हो पाते हैं। वही वास्तुशास्त्र में घर की दिशा को बहुत महत्व दिया गया हैं। पूर्व दिशा को मान सम्मान, शक्ति, नियंत्रण, संगठनात्मक कौशल, सामाजिक जुड़ाव, धन दौलत और कई सारी महत्वपूर्ण गुणों वाला माना जाता हैं। यह सूर्य की शक्ति वाली दिशा मानी जाती हैं। जो हमें रोशनी और जीवन प्रदान करती हैं। वही पूर्व दिशा में किसी भी तरह का कोई कट या फिर फैलाव व्यक्ति की निर्णय लेने की शक्ति को कम करता हैं।

वही इस दिशा का रंग हरा होता हैं। तथा तत्व वायु हैं। पूर्व कॉरिडोर में दो प्रवेश द्वार होते हैं। जिनसे पूर्व चार और पूर्व पांच कहा जाता हैं। वही शासन प्रबंध, शक्ति, धन मान सम्मान इन्हीं के द्वारा संचालित होता हैं। वही दो वास्तु देवता इन द्वारों के स्वामी माने जाते हैं। महेंद्र देवता पूर्व चार द्वार का स्वामी हैं। पूर्व चार का द्वार व्यापार और नौकरी दोनों के लिए बहुत ही भाग्यशाली माना जाता हैं। वही गर्दन का दांया भाग इसी से संचालित होता हैं। ये मान और सम्मान का दरवाजा हैं। जो महेंद्र देवता वरुण और यम में संतुलन पैदा करता हैं।

जानिए इस दिशा के लिए उपयोगी वास्तु टिप्स—
वही इस दिशा जोन में अगर घर का बैठक हो तो बहुत ही शुभ माना जाता हैं। यहां पर खेलने का स्थान,लाउन्ज, खाने की मेज लाभकारी साबित होती हैं। वही इस स्थान पर शौचालय का होना अशुभ माना जाता हैं। इससे व्यक्ति लोगों पर नियंत्रण ​नहीं रख पाता हैं। वही इस दिशा में सामजिक जुड़ाव बहुत ही सशक्त हो जाता हैं।

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