शूटिंग करते-करते वरुण धवन का हुआ ऐसा हाल, जिसे जानकर हैरान हो जाएंगे आप !

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बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन इन दिनों फिल्म ‘अक्टूबर’ के प्रमोशन में फाफी बिजी हैं और इनको इसके लिए काफी दूर दूर तक जाना पड़ रहा है।

 

आपको बता दें कि इस फिल्म में वह एक होटल मैनेजमेंट स्टूडेंट का किरदार निभा रहे हैं। इस फिल्म को वरूण ने इतनी गंभीरता से ले लिया की उनकी ऐसी हालत हो गई की सामने से गुजरने वाले लोग उन्हें पहचान तक नहीं रहे हैं ।

दरअसल, फिल्म ‘अक्टूबर’ के कई सीन्स दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में फिल्माए गए हैं। फिल्म के दौरान वरुण धवन को सारे काम- टॉयलेट सफाई, बर्तन धोना, खाना पकाना, छाड़-पोंछ खुद करना पड़ा।

रोमांटिक ड्रामा ‘अक्टूबर’ में काम करने के लिए वरुण धवन को अपनी फीस तक कम करनी पड़ी।

वरुण को फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि उन्होंने फीस से कॉम्प्रोमाइज कर लिया।

इसके साथ ही आपको बता दें कि फिल्म ‘अक्टूबर’ से बनीता संधू एक्टिंग डेब्यू करने जा रही हैं और इस फिल्म में उनके किरदार का नाम ‘शिहूली’ है।


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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