UWW Ranking Series : पहलवान सरिता को 57 किग्रा में मिला रजत

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Free Matteo Pellicone wrestling: Sarita bags silver in 57kg

एशियाई चैम्पियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता सरिता मोर को यहां जारी वल्र्ड रैंकिंग सीरीज (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) कुश्ती प्रतियोगिता में महिलाओं के 57 किग्रा के फाइनल में हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। 25 साल की सरिता को फाइनल में ब्राजील की गिउलिया रोड्रिगेज से 2-4 से हार झेलनी पड़ी। अंशु को 57 किग्रा के सेमीफाइनल में रांसेस्का इंडेलिकाटो से हारकर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

सात बार की नेशनल चैंपियन सरिता ने पिछले साल दिल्ली में एशियाई चैंपियनशिप में 59 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता था।

पुरुष वर्ग में कुलदीप मलिक को 72 किग्रा के ग्रीको रोमन वर्ग में रूस के चिंगीज लाबाजेनोव से 0-10 से हारकर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।

130 किग्रा वर्ग के ग्रीको रोमन के सेमीफाइनल में भी चेक गणराज्य के स्टीपन डेविड ने नवीन को हरा दिया और नवीन को कांस्य पदक मिला। 63 किग्रा में नीरज ने अमेरिका के सैमुअल जोंस को 6-4 से हराया और कांस्य पदक अपने नाम किया।

ओवरआल भारतीय ग्रीको रोमन टीम 82 अंकों के साथ पांचवें नंबर पर रही। रूस ने 175 अंकों के साथ टॉप किया।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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