उत्तराखण्ड के कैबिनेट मंत्री के बेटे की हादसे में मौत, योगी ने जताया दु:ख

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उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के छोटे बेटे अंकुर पांडेय की बुधवार तड़के करीब तीन बजे बरेली के पास एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक में डूबे परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

फरीदपुर बरेली के क्षेत्राधिकारी (सीओ) रामानंद राय ने बताया, “उत्तराखंड के शिक्षा एवं खेल मंत्री अरविंद पांडेय के पुत्र अंकुर पांडेय अपने साथी मुन्ना गिरी और पिंकू यादव के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए गोरखपुर जा रहे थे। तभी बरेली के पास फरीदपुर और रजऊ के नजदीक उनकी कार और एक ट्रक में आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें अंकुर और मुन्ना गिरी की मौत हो गई, जबकि पिंकू यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में उनकी कार के परखचे उड़ गए।” उन्होंने बताया कि अंकुर का शव मंत्री के उत्तराखंड के गोविंदपुर स्थित आवास पर पहुंच गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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