उत्तर प्रदेश : लावारिस मासूम बच्ची मिली, अस्पताल में भर्ती

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जनपद के नजीबाबाद में मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। महज 24 घंटे की एक बच्ची को एक दंपति लावारिस हालात में सड़क पर छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने बच्ची को उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया।

शुक्रवार सुबह 8:30 बजे नजीबाबाद में आईसीआईसीआई बैंक के पास एक घर के सामने एक दंपति महज 24 घंटे की बच्ची को कपड़े में लपेटकर छोड़ गया। बच्ची आवारा कुत्तों का शिकार बनती उससे पहले ही घर से निकले विक्की की निगाह उस बच्ची पर पड़ी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरियादिली दिखाते हुए उस बच्ची को पूजा अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर उपचार के बाद नजीबाबाद के गर्ग हॉस्पिटल में बच्ची को जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है।

खास बात यह कि बाल शिशु गृह के अधिकारियों को बार-बार सूचना दी गई, लेकिन किसी ने मौके पर पहुंचना गवारा नहीं समझा। मीडिया कर्मियों ने भी सूचना के लिए फोन मिलाया, लेकिन फोन को काट दिया गया। फिलहाल बच्ची नर्सरी में भर्ती है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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