उत्तर प्रदेश : जौनपुर में दीवार ढही, 3 बच्चों की मौत

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उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को जेसीबी मशीन से बालू हटाते समय दीवार गिरने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। एक का बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) संजय राय ने बताया कि रेहटी गांव के निवासी महेंद्र यादव के घर के पास पिछले दिनों मंगवाए गए बालू को शुक्रवार को जेसीबी मशीन से बालू हटाते समय एक दीवार गिर पड़ी। इसकी चपेट में आकर चार बच्चे घायल हो गए। बच्चों को ग्रामीणों ने आनन फानन में मलबे से निकाला, लेकिन तब तक एक की मौत हो चुकी थी।

उन्होंने बताया कि तीन घायलों को जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में आयुष (12), असजद (6) और शिवहरि (आठ) है। वहीं चौथे बच्चा बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजे हैं।

वहीं थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर देवतानंद सिंह ने बताया कि हादसे के संबंध में जिस मकान के अंदर बालू डाला जा रहा था, उसके मालिक महेंद्र यादव और जेसीसबी चालक के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में लगी जेसीबी वहां कैसे पहुंची, इसकी छानबीन की जा रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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