उत्तर प्रदेश : बाइक से गिरी मां को ट्रक ने कुचला, बेटा बचा

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के औराई थाने के उगापुर नहर पुलिया के पास गुरुवार को अनियंत्रित बाइक से गिरकर जौनपुर की एक महिला ट्रक के पिछले पहिए के नीचे आ गई, जिस कारण उसकी मौत हो गई। उसका बेटा हालांकि बच गया। इस दौरान कुछ समय के लिए जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

जौनपुर जिले के गंधौना गांव निवासी गिरीश दूबे का पुत्र सुमित दूबे अपनी मां पान कुमारी (45) को बाइक से लेकर मीरजापुर की तरफ से आ रहा था। जब वह उगापुर पुलिया के पास पहुंचा तो उसकी बाइक अनियंत्रित हो गई और उस पर बैठी मां सड़क पर गिर गयी। उसी दौरान पीछे से आ रही एक ट्रक ने कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। भदोही की यह सड़क शासन और प्रशासन की लापरवाही के कारण मौत की सड़क बन चुकी है।

मौके पर पहुंचे प्रभारी निरीक्षक ट्रक को हटवाकर जाम समाप्त कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ट्रक का ड्राइवर फरार हो गया। मां के शव से लिपट कर बेटे को देख सभी की आंखें नम हो गईं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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