उत्तर प्रदेश : राजा भैया ने रैली कर दिखाई ताकत

0
168

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने शुक्रवार को राजधानी के रमाबाई मैदान में रैली कर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया। चर्चा थी कि राजा भैया इस कार्यक्रम में अपनी प्रस्तावित नई पार्टी के नाम और एजेंडे की घोषणा कर सकते हैं, पर उन्होंने मामला निर्वाचन आयोग के पास होने के कारण ऐसा नहीं किया। राजा भैया ने कहा, “हमने सर्वे कराया था कि हमें क्या करना चाहिए। इसमें निर्दलीय रहने, किसी पार्टी में शामिल होने या नया दल गठित करने की राय मांगी थी, जिसमें 20 लाख लोगों ने राजनीतिक दल बनाने को कहा है। इसके बाद मैंने पार्टी बनाने का फैसला किया।”

उन्होंने कहा, “हमने आयोग को तीन नाम दिए हैं- जनसत्ता दल, जनसत्ता पार्टी और जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी। इनमें से कोई एक नाम तय होगा। जब पार्टी का गठन हो जाएगा, तब एजेंडा भी बनाया जाएगा। हमारी पार्टी गरीब, किसान और मजदूर के लिए समर्पित होगी।”

राजा भैया ने कहा, “आजकल लोग जाति पूछकर मुआवजा दे रहे हैं। क्या उत्पीड़न होने पर दलित को ज्यादा कष्ट होगा, अन्य को नहीं? हम दलित विरोधी नहीं हैं, लेकिन दलित के लिए अलग मुआवजा, यह भेदभाव क्यों? हम यह नहीं कहते कि दलित समाज के मुआवजे में किसी प्रकार की कमी हो, अगर किसी की यहां हत्या हो जाती है तो मुआवजे में भेदभाव न हो।

उन्होंने कहा, “देश की सुरक्षा के लिए जवान सीमा पर तैनात रहते हैं, लेकिन युद्ध के दौरान शहीद होने वाले जवानों के परिजनों को योजनाओं का लाभ मिलता है। इसलिए हम सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए भी काम करेंगे। हमारी पार्टी का एजेंडा है कि सेना और अर्धसैनिक बल के जवानों के सीमा पर शहीद होने पर आश्रितों को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाए।”

राजा भैया ने आगे कहा, “हमें इतनी ज्यादा भीड़ की आशा नहीं थी, पर यहां पर पूरे देश के कोने-कोने से लोग आए हैं। सभी का दिल से आभार करते हैं। गृहस्थी एक दिन में इकट्ठा नहीं होती। जैसे घर बनता तो किसी दिन बेड आता है, किसी दिन कुछ और। इसलिए जनसत्ता पार्टी बनने पर सारी गृहस्थी इक्कठा हो जाएगी।”

उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे मुद्दे हैं, जिसमें बहुत से दल गोलमोल जवाब देते हैं। जल्दी ही पार्टी का घोषणापत्र जारी होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से इन मुद्दों पर कहा जाएगा। उत्पीड़न होने पर सवर्णो को भी मुआवजा दिए जाने की बात होगी।

विधायक ने कहा, “वर्ष 1989 में राजीव गांधी ने एससी-एसटी एक्ट बनाया गया और इसको अब और जटिल बनाया जा रहा है। अभी हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने इस एक्ट पर निर्णय दिया। उसमें संशोधन के लिए संसद में विधेयक लाया गया। यह एक्ट हमारे समाज के लिए गलत है और जो राजनीतिक दल एक-दूसरे को गालियां देते हैं, उन्होंने एक स्वर से इस एक्ट को संसद में पास कर दिया।”

राजा भैया ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत वर्ष 1993 में की थी। वह कुंडा विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। उनका प्रभाव इलाहाबाद के समीप आने वाले कई जिलों में है। वहां के विधायक और सांसद उनके लगातार संपर्क में रहते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleत्वचा के दाग धब्बों और चेहरे की झुर्रियों को पलभर में दूर कर देगा यह कैप्सूल
Next articleआपको कैंसर है या नहीं, इन लक्षणों से करें आसानी से पता
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here