उत्तर प्रदेश: प्रो. राजाराम शुक्ल संपूर्णानंद संस्कृत विवि के कुलपति बने

0
321

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राम नाईक ने प्रो. राजाराम शुक्ल को वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है।

प्रो. शुक्ल काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय अंतर्गत वैदिक दर्शन विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक पद पर कार्यरत थे।

राज्यपाल की प्रमुख सचिव जूथिका पाटणकर ने आईपीएन को बताया कि प्रो. राजाराम शुक्ल की कुलपति के रूप में नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए की गई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous article4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वाले स्मार्टफोन पर 2,000 रूपये का डिस्काउंट
Next articleतो ये हैं भारत का मास्टरप्लान जिससे भविष्य की जंग से चुटकियों में निपट लेगी सेना
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here