उत्तर प्रदेश : आईपीएस अफसर सुरेंद्र दास जीवन की जंग हारे

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जहर खाने वाले आईपीएस अफसर सुरेंद्र कुमार दास की इलाज के दौरान रविवार को अस्पताल में मौत हो गई। वह पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे और मौत से जूझ रहे थे। उन्होंने 12 बजकर 19 मिनट पर कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में अंतिम सांस ली। जहर खाने से पहले दास ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था।

बलिया के रहने वाले 2014 बैच के आईपीएस अफसर सुरेंद्र दास इस समय कानपुर में एसपी (सिटी) पूर्वी के पद पर थे। बुधवार की सुबह उन्होंने कैंट स्थित अपने सरकारी आवास में जहर खा लिया था। सर्वोदय नगर के रीजेंसी अस्पताल में आईपीएस सुरेंद्र की रविवार को मौत हो गई।

जानकारी मिली है कि सुरेंद्र कुमार ने पारिवारिक कलह के कारण आत्मघाती कदम उठाया। कलह के कारणों को लेकर अभी भी छानबीन की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने उनके बेडरूम से उल्टी के सैंपल लिए थे, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। अभी जांच का खुलासा नहीं हो सका है। उनकी पत्नी रवीना खुद डॉक्टर हैं।

पति के जहर खाने के बाद डॉ. रवीना ने उन्हें उल्टियां भी कराईं, ताकि जहर का असर कम हो सके। जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो पत्नी उन्हें अस्पताल ले गई थीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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