उत्तर प्रदेश: आखिर क्यों दो बच्चों को जहर देकर मां ने की खुदकुशी, जानिए पूरा मामला !

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कैंट क्षेत्र में पति की मौत के बाद से तनावग्रस्त महिला ने अपने दो बच्चों को जहर देने के बाद खुद फांसी लगकर कर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया में रहने वाले सुरेश सिंह के बड़े बेटे संतोष सिंह ने करीब चार साल पहले नंदानगर रेलवे क्रासिंग पर ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली थी। बेटे की मौत के बाद से उसकी पत्नी शशि सिंह (38) अपने दो बच्चों दीक्षा (9) और नैवेद्य (4) के साथ अपने सास-ससुर और देवर के साथ रहती थी। बताते हैं कि पति की मौत के बाद से शशि तनाव में रहती थी।

बुधवार रात सभी ने साथ भोजन किया और अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। देर रात किसी वक्त शशि ने दोनों बच्चों दीक्षा और नैवेद्य को जहर दे दिया और खुद फांसी लगाकर जान दे दी। गुरुवार सुबह जब शशि के कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों ने दरवाजा खटखटाया। जिस पर अंदर से बंद दरवाजा खुल गया और परिजनों ने कमरे में शशि का शव फांसी पर लटका देखा और दोनों बच्चों का शव बेड पर पड़ा देखा।

मामले की सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने अपनी छानबीन कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। उधर मृतका के ससुर सुरेश सिंह ने बताया कि पति की मौत के बाद उनकी बहू अवसाद में रहती थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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