उत्तर प्रदेश : कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से 7 बच्चियां गायब

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जिले के पडरौना शहर से महज तीन किलोमीटर दूर खिरकिया में संचालित पडरौना के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के निरीक्षण में 12 बालिकाएं मौके पर मौजूद नहीं थीं। पूछताछ में पता चला कि पांच बालिकाओं की तरफ से अवकाश प्रार्थनापत्र मिला है, जबकि शेष सात के बारे में कोई लिखित सूचना नहीं है। भवन की स्थिति भी जर्जर थी। एसडीएम ने वार्डेन को जरूरी दस्तावेजों के साथ शुक्रवार को अपने कार्यालय में तलब किया है।

एसडीएम सदर गुलाबचंद्र के पहुंचते ही कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अफरातफरी मच गई। भवन की छत जर्जर हाल में मिली। बताया गया कि बारिश में छत टपकती है। बालिकाओं के सोने की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। सफाई की व्यवस्था भी काफी खराब रही। एसडीएम ने बालिकाओं की उपस्थिति के बारे में पूछा तो मालूम हुआ कि 88 बालिकाएं यहां रहती हैं। उनमें 12 बालिकाएं गायब थीं।

एसडीएम ने जब इस अनुपस्थित बारे में पूछा तो वार्डेन संगीता सिंह ने बताया कि बालिकाएं अवकाश पर हैं। लेकिन वह सिर्फ पांच बालिकाओं की ओर से दिए गए अवकाश प्रार्थनापत्र को ही प्रस्तुत कर पाईं।

एसडीएम ने बताया कि 12 बालिकाएं कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में उस समय नहीं थीं। उनमें पांच कक्षा छह की हैं तथा सात कक्षा सातवीं की। पांच बच्चियों की तरफ से छुट्टी का प्रार्थनापत्र दिया गया था। छत जर्जर मिली और परिसर में भी सफाई नहीं थी। वार्डेन से स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा उन्हें दस्तावेजों के साथ आज ही कार्यालय बुलाया गया है। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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