उत्तर प्रदेश : बच्ची की आबरू की कीमत 50 हजार रुपये लगाई

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जनपद के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को गांव में हुई पंचायत में बच्ची की आबरू की कीमत 50 हजार रुपये लगाई गई और आरोपी को 20 चप्पल मारने की सजा सुनाई गई। इसके बाद पंचों ने सुलह करवाकर मामले को रफा-दफा कर दिया। पुलिस ने इस घटना से अनभिज्ञता जताई है।

सूत्रों से जानकारी मिली है कि नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के एक गांव की नौ वर्षीय बच्ची रिश्ते में चाचा लगने वाले पड़ोस के आरोपी युवक के घर सोमवार की देर शाम टेलीविजन देखने गई थी। घर में बच्ची को अकेली पाकर युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची रोती हुई अपने घर गई और मां को आपबीती बताई। थोड़ी ही देर में वहां भीड़ जुट गई।

लोग आरोपी के घर जाने को तैयार हुए, लेकिन कुछ लोगों ने रात का वक्त बताकर पीड़िता के घरवालों को रोक लिया। सुबह पीड़िता की मां ने ‘डायल 100’ की पुलिस को सूचना देकर बुला लिया। पुलिस के पहुंचते ही कुछ लोग फिर वहां आ गए और बच्ची से दुष्कर्म को ‘मारपीट की मामूली घटना’ बताकर पुलिस को लौटा दिया।

मंगलवार को सुबह से दोपहर तक हुई पंचायत में बच्ची के आबरू की कीमत 50 हजार रुपये लगाई गई और आरोपी को 20 चप्पल मारकर छोड़ दिया गया।

नेबुआ नौरंगिया थाने के एसओ निर्भय सिंह ने बुधवार को बताया कि इस घटना की कोई सूचना उन्हें नहीं मिली है। उन्होंने कहा, “अगर ऐसी कोई बात है तो यह जघन्य अपराध है। तहरीर मिलते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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