उत्तर प्रदेश : मिट्टी की ढांग गिरने से 2 मजदूर दबे, मौत

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जनपद के कासगंज के अमापुर कोतवाली क्षेत्र के सेवका गांव में गुरुवार सुबह मिट्टी की ढांग गिरने से उसके नीचे दबकर दो मजदूरों की मौत हो गई। दोनों मजदूर एक मकान के निर्माण के लिए नींव खोद रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं।

अमापुर कोतवाली क्षेत्र के सेवका गांव निवासी रामप्रकाश अपने मकान के सामने खाली प्लॉट में भवन निर्माण के लिए नींव की खुदाई कराने में लगे थे। नींव की खुदाई गांव तिकुरिया निवासी दो मजदूर हरिओम पुत्र उदयवीर और राजकुमार पुत्र भूप सिंह समेत अन्य मजदूर कर रहे थे। नींव खुदाई के दौरान फंसे पत्थर को निकालने वक्त अचानक मिट्टी की ढांग भरभरा कर मजदूरों पर गिर पड़ी। उसके नीचे दोनों मजदूर हरिओम और राजकुमार दब गए। किसी तरह मजदूरों को मिट्टी हटाकर बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दोनों की सांस थम चुकी थी।

सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और वहां कोहराम मच गया। घटना की सूचना पर एसडीएम कृपाशंकर पांडेय, सीओ प्रदीप कुमार, तहसीलदार मनोज प्रकाश और कोतवाल शशिकांत शर्मा गांव में पहुंचे और ममाले की जानकारी ली। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है, वहीं तहसील की टीम ने रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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