अमेरिकी ओपन : डेल पोट्रो ने फाइनल में जगह बनाई

0
122

अर्जेटीना के टेनिस खिलाड़ी जुआन मार्टिन डेल पोट्रो ने यहां जारी साल के चौथे और अंतिम ग्रैंडस्लैम में शुक्रवार को अमेरिकी ओपन के फाइनल में जगह बना ली है। वर्ष 2009 में यह खिताब अपने नाम करने वाले डेल पोट्रो ने स्पेन के दिग्गज राफेल नडाल को मात दी।

डेल पोट्रो ने पहले दो सेट को 7-6(3) और 6-2 से अपने नाम किया, जिसके बाद घुटने की चोट के कारण नडाल को मैच से हटना पड़ा। पहले सेट में 4-3 से आगे चल रहे नडाल को मैच में पहली बार दाएं घुटने में तकलीफ जिसके बाद उन्होंने टेप लगाया। उन्होंने बाद में टेप को हटा दिया लेकिन दूसरे सेट में उन्हें फिर से टेप लगाना पड़ा।

दूसरे सेट के बाद नडाल ने निर्णय लिया कि वह मैच में आगे नहीं खेल सकते। नडाल ने कहा, “मैंने उतना इंतजार किया जितना मैं कर सकता था। मैच खत्म होने से पहले हटना मेरे लिए मुश्किल था लेकिन एक समय आपको ऐसा मुश्किल निर्णय लेना होता है।”

फाइनल में डेल पोट्रो का मुकाबला जापान के की निशिकोरी या सर्बिया के दिग्गज नोवाक जोकोविक से होगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous article950 रुपए में नया फीचर फोन लॉन्च, Jio Phone 2 को मिलेगी टक्कर
Next articleपाकिस्तान सरकार ने किया ऐलान सिख यात्रियों के लिए खुलेगा करतारपुर बॉर्डर, जरूरी नहीं होगा वीजा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here