यूएस ओपन चैम्पियन बियांका को मिला कस्टमाइज्ड डब्ल्यूडब्ल्यूई बेल्ट

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साल के चौथे ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन की मौजूदा चैम्पियन कनाडा की बियांका एंड्रेस्कू को वल्र्ड रेसलिंग चैम्पियनशिप की ओर से एक कस्टमाइज्ड डब्ल्यूडब्ल्यूई बेल्ट भेंट किया गया।

19 साल की बियांका ने 23 बार की ग्रैंड स्लैम विजेता अमेरिका की सेरेना विलियम्स को हराकर पहली बार कोई ग्रैंड स्लैम जीता था। साथ ही वह ग्रैंड स्लैम जीतने वाली पहली कनाडाई खिलाड़ी बनी थीं।

बियांका ने डब्ल्यूडब्ल्यूई कस्टमाइज्ड बेल्ट मिलने के बाद उसकी तस्वीर के साथ एक ट्वीट किया और लिखा, “कस्टमाइज्ड बेल्ट देने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूई का धन्यवाद।”

इस पर डब्ल्यूडब्ल्यूई सुपरस्टार ट्रिपल एच. ने लिखा, “आपके डब्ल्यूडब्ल्यूई में हमेशा स्वागत है।”

कस्टमाइज्ड डब्ल्यूडब्ल्यूई बेल्ट पर बियांका का पूरा नाम लिखा हुआ है और साथ ही साथ यूएस ओपन का लोगो भी बना हुआ है।

बियांका ने 8 सितम्बर को सेरेना को फाइनल मुकाबले में 6-3, 7-5 से हराकर इतिहास रच दिया था। वह 2004 में फ्रेंच ओपन खिताब जीतने वाली रूसी की स्वेतलाना कुज्नेतोस्कोवा के बाद ग्रैंड स्लैम जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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