अमेरिकी सेना ने आईएस की 1500 महिलाओं को सीरिया से इराक भेजा

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तुर्की द्वारा उत्तरी सीरिया में नौ अक्टूबर को हमला करने के बाद यहां स्थित अमेरिकी सेना ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) की 1,500 से ज्यादा महिलाओं को इराक भेज दिया है। सरकारी न्यूज एजेंसी सना ने यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की सोमवार की रिपोर्ट के अनुसार, कुर्द लड़ाकों पर तुर्की के हमलों के साथ ही अमेरिकी सैनिक उत्तरी सीरिया से जैसे लौट रहे हैं, वहीं वे अब तक पूर्वोत्तरी प्रांत हसकाह में स्थित अल-होल शिविर से लगभग 1,500 महिलाओं को इराक ले गए हैं।

अल-होल शिविर में आईएस के हजारों लड़ाके और महिलाएं ठहरे हुए हैं जो पहले आईएस के कब्जे में रहे पूर्वी सीरिया से भाग रहे थे।

इस शिविर को कुर्दो की अगुआई में सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस चला रहे हैं, जिन्होंने पूर्वी सीरिया में अमेरिका की अगुआई वाले गठबंधन से आईएस को कड़ी टक्कर दी।

हालांकि तुर्की ने जबसे कुर्द बलों के खिलाफ युद्ध छेड़ा है, अमेरिका ने तबसे अपना ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है और उसके सैनिक इराक जाने लगे हैं। तुर्की इन लड़ाकों को आतंकवादी और अलगाववादी मानता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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