अमेरिकी एजेंसी फिच ने एसबीआई, बीओबी की रेटिंग घटाई

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अमेरिकी एजेंसी फिच रेटिंग्स ने बुधवार को सरकारी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) दोनों की व्यवहार्यता रेटिंग (वीआर) एक पायदान घटा दी और एसबीआई, बीओबी, केनरा बैंक और बैंक ऑफ इंडिया की लांग-टर्म इश्यूअर डिफाल्ट रेटिंग्स (आईजीआर्स) स्थिर दृष्टिकोण के साथ ‘बीबीबी’ कर दी। अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि एसबीआई के वीआर को एक पायदान घटाकर ‘बीबीप्लस’ से ‘बीबीबीमाइनस’ कर दिया गया है, जो बैंक के कमजोर पूंजीकरण, लंबे समय से जारी परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्या और कमजोर कमाई को दर्शाता है।

भारतीय बैंकों पर नकारात्मक क्षेत्र का ²ष्टिकोण रखने वाले फिच ने एक बयान में कहा, “फिच ने एसबीआई और बीओबी की व्यवहार्यता रेटिंग (वीआर) को ‘बीबीप्लस’ से एक पायदान घटाकर ‘बीबी’ कर दिया है, जो लगातार कमजोर संपत्ति गुणवत्ता और पूंजी पर कमाई के नकारात्मक प्रभाव और कमजोर आंतरिक जोखिम प्रोफाइल को दर्शाता है।”

फिच ने बयान में कहा, “बैंकों के मूल पूंजी बफर भी मध्यम झटके के लिए अधिक कमजोर दिखाई देते हैं।”

बयान में कहा गया है कि भारत के 21 सरकारी बैंकों में से 19 ने पिछले वित्त वर्ष में घाटे की सूचना दी है, इन बैंकों में सरकार ने इस साल 13 अरब डॉलर की पूंजी डाली है।

फिच ने कहा, “हमारा मानना है कि विकास के लिए और बैलेंसशीट को मजबूत बनाने के लिए इन बैंकों में और पूंजी लगाने की जरूरत है।”

फिच ने इंगित किया कि एसबीआई के गैर निष्पादित ऋण अनुपात (फंसे हुए कर्जे) में 11 फीसदी की वृद्धि हुई है, जिससे मूल पूंजी पर जोखिम बढ़ा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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